Monsoon To Remain Near Normal This Year, Predicts Weather Department – इस बार मानसून के सामान्य रहने का अनुमान, सूखे के आसार हैं कमः मौसम विभाग

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भारतीय मौसम विभाग ने दक्षिण-पश्चिम मानसून के इस बार सामान्य रहने की उम्मीद व्यक्त की है।  हालांकि मौसम विभाग ने अलनीनो की आशंका लगाई है, लेकिन इसका प्रभाव न के बराबर रहेगा। 

96 फीसदी भूभाग पर होगी बारिश

मौसम विभाग ने कहा है कि इस बार मानसून देशभर में करीब 96 फीसदी रहेगा। इस पूर्वानुमान में पांच फीसदी का मार्जिन ऑफ ऐरर हो सकता है। खेती के लिए और देश की अर्थव्यवस्था के लिए यह मानसून जरूरी होता है, क्योंकि जून से लेकर के सितंबर के बीच देश में 70 फीसदी बारिश होती है। 

यह होता है सामान्य मानसून

अगर देश में 96 से लेकर के 104 फीसदी बारिश होती है तो फिर उसे सामान्य मानसून माना जाता है। वहीं 90 से 96 फीसदी के बीच हुई बारिश सामान्य से नीचे माना जाता है। 90 फीसदी से कम बारिश को कमजोर मानसून माना जाता है। 

पांच में से तीन साल पड़ा सूखा

पिछले पांच साल में तीन साल देश में सूखा पड़ा है। 2014, 2015 और 2018 में बारिश 90 फीसदी से कम हुई थी। 2018 में हालांकि सूखा ज्यादा नहीं पड़ा था, क्योंकि सितंबर के बाद भी कई जगह बारिश होती रही। 

स्काईमेट ने लगाया था यह अनुमान

मौसम का अनुमान जारी करने वाली प्राइवेट एजेंसी स्काईमेट ने कहा है कि जून से सितंबर तक चार माह की बारिश सामान्य से 7% तक कम रह सकती है। गर्मी भी ज्यादा पड़ेगी। स्काईमेट के वाइस-प्रेसिडेंट महेश पालावत ने बताया कि अलनीनो की वजह से न सिर्फ मानसून औसत से कम रहेगा, बल्कि मध्य व दक्षिण भारत के हिस्से में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ेगी। मध्यप्रदेश, विदर्भ व दक्षिणी राज्यों के कुछ हिस्सों में तापमान अभी से 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक है, जो यहां के सामान्य तापमान से 4 से 5 डिग्री तक ज्यादा है।

मई से जून के पहले हफ्ते तक भी इन क्षेत्रों में 4 से 5 डिग्री तक अधिक गर्मी पड़ेगी। दिल्ली एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अभी हीटवेव की स्थिति नहीं है, लेकिन यहां भी गर्मी बढ़ेगी। हालांकि उत्तरी और उत्तर पश्चिमी भारत के हिस्सों में प्री-मानसून एक्टिविटी बार-बार होती रहेगी।

मौसम विभाग भी कह रहा इस बार गर्मी बढ़ेगी 

मौसम विभाग के महानिदेशक केजे रमेश ने कहा कि अप्रैल से जून के बीच मध्य भारत के मौसम संबंधी उपखंडों (मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात) और उत्तर पश्चिम भारत (जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली व राजस्थान) के कुछ उपखंडों में औसत तापमान सामान्य से 0.5 डिग्री सेल्सियस से एक डिग्री ज्यादा रहने की आशंका है। औसत तापमान किसी दिन विशेष पर पिछले 50 वर्ष में दर्ज हुए तापमान का औसत होता है।

अच्छी बारिश इसलिए है जरूरी

हालांकि देश के अच्छी बारिश होना बहुत जरूरी है। हालांकि खेती से होने वाली पैदावार भारत की अर्थव्यवस्था का केवल 14 फीसदी है लेकिन इससे देश की आधी से ज्यादा आबादी को रोजगार मिलता है। मानसून से देश को 70 फीसदी बारिश मिलती है, जो पहले खरीफ और फिर राबी सीजन में किसानों को पानी की उपलब्धता बरकरार रखता है। इसी पानी की बदौलत सिंचाई व्यवस्था सुचारू तौर पर चलती है। 

इसलिए हैं इस बार अल नीनो के आसार

प्रशांत महासागर के इस बार ज्यादा गर्म रहने की संभावना है। इस महासागर से ही भारत में मानसून के बादल आते हैं। अगर यह महासागर नरम रहता है तो फिर देश में अच्छी बारिश की संभावना रहती है। उसको हम ला नीना कहते हैं। लेकिन कम बारिश और सूखा पड़ने की स्थिति में अल नीनो होता है। अबकी बार महासागर के गर्म रहने के आसार हैं जो देश के मानसून पर अपना असर डालेगा।  

भारतीय मौसम विभाग ने दक्षिण-पश्चिम मानसून के इस बार सामान्य रहने की उम्मीद व्यक्त की है।  हालांकि मौसम विभाग ने अलनीनो की आशंका लगाई है, लेकिन इसका प्रभाव न के बराबर रहेगा। 

96 फीसदी भूभाग पर होगी बारिश

मौसम विभाग ने कहा है कि इस बार मानसून देशभर में करीब 96 फीसदी रहेगा। इस पूर्वानुमान में पांच फीसदी का मार्जिन ऑफ ऐरर हो सकता है। खेती के लिए और देश की अर्थव्यवस्था के लिए यह मानसून जरूरी होता है, क्योंकि जून से लेकर के सितंबर के बीच देश में 70 फीसदी बारिश होती है। 

यह होता है सामान्य मानसून

अगर देश में 96 से लेकर के 104 फीसदी बारिश होती है तो फिर उसे सामान्य मानसून माना जाता है। वहीं 90 से 96 फीसदी के बीच हुई बारिश सामान्य से नीचे माना जाता है। 90 फीसदी से कम बारिश को कमजोर मानसून माना जाता है। 





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