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Supreme Court Issues Notice To Centre On Pil Filed Against The Mha Notification – एजेंसियों को मिले कंप्यूटरों की जांच के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 14 Jan 2019 11:32 AM IST

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उच्चतम न्यायालय ने कंप्यूटर प्रणालियों को इंटरसेप्ट करने, उन पर नजर रखने और उनके आंकड़ों का विश्लेषण करने के लिए 10 एजेंसियों को अनुमति देने वाले सरकारी नोटिस के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र को सोमवार को नोटिस जारी किया। शीर्ष अदालत ने केंद्र से छह सप्ताह के भीतर नोटिस का जवाब देने को कहा है।

इससे पहले केंद्र सरकार की 20 दिसंबर की अधिसूचना को चुनौती देते हुए न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार सूचना एवं प्रौद्योगिकी कानून के तहत केन्द्र की 10 जांच एवं जासूसी एजेंसियों को कंप्यूटरों को इंटरसेप्ट करने और उनके आंकड़ों का विश्लेषण करने का अधिकार प्राप्त हो गया है।

3 जनवरी को याचिकाकर्ता वकील एमएल शर्मा ने एजेंसियों को मिले कंप्यूटर की निगरानी के अधिकार वाली अधिसूचना को चुनौती दी थी। चीफ जस्टिस रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अपनी याचिका का उल्लेख करते हुए इसपर जल्द सुनवाई करने की गुहार लगाई थी। उन्होंने  कहा था कि उन्हें 2 जनवरी को यह जानकारी भी मिली है कि जजों के परिवार के लोगों के टेलिफोन और कंप्यूटरों पर निगरानी रखी जा रही है। 

शर्मा ने कहा था कि यह मामले बेहद गंभीर है, लिहाजा इस पर जल्द सुनवाई की जानी चाहिए। मालूम हो कि वकील शर्मा पर ही पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट फालतू जनहित याचिका दायर करने पर जुर्माना लगाया था। अपनी याचिका में उन्होंने 20 दिसंबर की इस सरकारी अधिसूचना को निरस्त करने की गुहार लगाई थी। साथ ही याचिका में यह भी कहा था कि इस अधिसूचना के आधार पर इन एजेंसियों को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत जांच व आपराधिक कार्यवाही शुरू करने से रोका जाए। 
 

उच्चतम न्यायालय ने कंप्यूटर प्रणालियों को इंटरसेप्ट करने, उन पर नजर रखने और उनके आंकड़ों का विश्लेषण करने के लिए 10 एजेंसियों को अनुमति देने वाले सरकारी नोटिस के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र को सोमवार को नोटिस जारी किया। शीर्ष अदालत ने केंद्र से छह सप्ताह के भीतर नोटिस का जवाब देने को कहा है।

इससे पहले केंद्र सरकार की 20 दिसंबर की अधिसूचना को चुनौती देते हुए न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार सूचना एवं प्रौद्योगिकी कानून के तहत केन्द्र की 10 जांच एवं जासूसी एजेंसियों को कंप्यूटरों को इंटरसेप्ट करने और उनके आंकड़ों का विश्लेषण करने का अधिकार प्राप्त हो गया है।

3 जनवरी को याचिकाकर्ता वकील एमएल शर्मा ने एजेंसियों को मिले कंप्यूटर की निगरानी के अधिकार वाली अधिसूचना को चुनौती दी थी। चीफ जस्टिस रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अपनी याचिका का उल्लेख करते हुए इसपर जल्द सुनवाई करने की गुहार लगाई थी। उन्होंने  कहा था कि उन्हें 2 जनवरी को यह जानकारी भी मिली है कि जजों के परिवार के लोगों के टेलिफोन और कंप्यूटरों पर निगरानी रखी जा रही है। 

शर्मा ने कहा था कि यह मामले बेहद गंभीर है, लिहाजा इस पर जल्द सुनवाई की जानी चाहिए। मालूम हो कि वकील शर्मा पर ही पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट फालतू जनहित याचिका दायर करने पर जुर्माना लगाया था। अपनी याचिका में उन्होंने 20 दिसंबर की इस सरकारी अधिसूचना को निरस्त करने की गुहार लगाई थी। साथ ही याचिका में यह भी कहा था कि इस अधिसूचना के आधार पर इन एजेंसियों को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत जांच व आपराधिक कार्यवाही शुरू करने से रोका जाए। 
 





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